कहानी एक 7 साल की छोटी बच्ची रानी की है, जो फरीदाबाद की एक झुग्गी में रहती थी। तेज बुखार और संक्र…
कहानी एक 7 साल की छोटी बच्ची रानी की है, जो फरीदाबाद की एक झुग्गी में रहती थी। तेज बुखार और संक्रमण के कारण उसकी हालत बहुत गंभीर हो गई थी। उसकी माँ रोते हुए दवा लाने के लिए इधर-उधर भटक रही थी, लेकिन महंगी एंटीबायोटिक दवाएं खरीदने के पैसे नहीं थे।
तभी मेडिसिन वाला फाउंडेशन के वॉलंटियर को सूचना मिली। मात्र 15 मिनट में दवा पहुँच गई। तीन दिन बाद रानी मुस्कुराते हुए अपनी माँ के गले लग गई।
माँ ने कहा: “बेटी, ये दवा नहीं... इंसानियत ने तुम्हें बचाया है।”
पोस्टर गरीब बच्चों की मदद, इंसानियत और समाज सेवा का सुंदर संदेश देता है। यह दर्शाता है कि कैसे एक छोटी सी मदद किसी की जान बचा सकती है।